कंकाल माँ हिंदी कहानी

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कंकाल माँ की कहानी

कंकाल माँ की कहानी – सूरज एक अनाथ २५ साल का लड़का था ,और गांव के मंदिर में साफ सफाई करता था। वह से जो उसे मिल जाता उसे ही खा कर अपना जीवन ब्यतीति करता था। सूरज ने अपने माता – पिता को कभी नहीं देखा था परन्तु वह अपने गांव के लोगो के मुँह से यह सुनाता था की उसकी माँ चोर थी इसलिए वह सरम के कारन गांव से भाग गयी और पिता पत्नी के इस चरित्र के कारन सन्यासी हो गए और इसी वजह से सूरज के गांव में कोई इज्जत नहीं करता था और सभी उसे बुरी नजर से देखा करते थे। एक दिन उस गांव का राजा शीकार करने के लिए जा रहा था तभी अचानक उसके दिल में दर्द होने लगा और राजा उस मंदिर में आराम करने के लिए आ गया और वहा पर राजा की तबियत जायदा ख़राब होने लगी उसी समय वही पर सूरज पहुंचा और राजा की मदद की उसकी मदद से राजा की तबियत ठीक हो गयी उसके बदले में राजा ने सूरज को बहुत सा धन और दौलत इनाम में दिया। और राजा द्वारा दी गयी दौलत से सूरज ने सोचा की अपने घर की मरमत करा ली जाये क्यूंकि सूरज का घर पूरी तरह से टुटा हुआ था और वह सोचा की उसी में एक छोटी सी किराने की दुकान खोल लूंगा जिससे मेरे रोज के खर्च भी चलते रहेंगे और मेरा घर भी तैयार हो जायेगा। और उसने मजदूरों को बुला कर अपने घर की मरमत करना सुरु कर देता है ,उसके घर के पीछे के दिवार टूट गयी थी इसलिए जब मजदूर उस दिवार की खुदाई करने लगे तो मजदूरों को वह से बहुत ही भयानक आवाजे सुनाई देने लगी ,कोई कह रहा था की “अभी चले जाओ मैं अभी सो रही हु परेशान मत करो अगर मैं जाग गयी तो किसी को नहीं छोडूंगी “।

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कंकाल माँ की कहानी

ऐसी आवाजे सुनकर मजदूर वह से भाग गए और सूरज के घर में काम करने के लिए मन कर दिया ,इस वजह से सूरज बहुत परेशान हो गया उसका घर भी पूरी तरह से खुदा पड़ा था और उसके पास रहने के लिए कोई जगह भी नहीं थी और सोचा अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा और वह उस दिवार के पास चला गया ,अचानक उसे मह्शूश हुआ की उस दिवार के पास कोई औरत बैठी हुई है और रो रही है। सूरज उसे पूछता है की अरे माँ तुम कोन हो और क्यों रो रही हो और तुम मेरे घर में कैसे आ गयी हो और तुम्हे क्या चाहिए मैं तुम्हारी जरूर मदद करूँगा पर तुम इस तरह रो मत , तब उस औरत ने कहा की क्या तुझे अपनी माँ की याद नहीं आती है ,क्या तुम्हे अपनी माँ को देखने का मन नहीं करता ,क्या तुम नहीं जानना चाहते की अचानक तुम्हारी माँ कहा चली गयी , सूरज बोला देखो तुम जो भी हो मुझे अपने माता – पिता के बारे में बात करना बिलकुल पसंद नहीं है, अगर तुम्हे किसी मदद की जरूरत हो तो बताओ वरना मेरे घर से निकल जाओ। इस बात को सुनकर वो औरत जोर से चीख उठी और बोली ऐ मेरा घर है मेरा मैंने इस घर को अपने पैसो से ख़रीदा है और उस औरत ने अपना घूँघट उठा दिया उसे देख कर सूरज भी जोर से चिल्ला उठा क्यूंकि वो औरत नहीं थी वह एक कंकाल थी जो साडी पहनकर रो रही थी। सूरज को डरता हुआ देख कर बोली क्या रे सूरज इतनी बहादुर औरत का बेटा होकर इसतरह रो रहा है। तू इंद्रावती का बेटा है जिसने मरने के बाद भी कोई गलत काम नहीं करि। सूरज बोला तुम हमारी माँ को कैसे जानती हो वो औरत बोली मैं ही तुम्हारी माँ हु अब तुम अपने को कभी अकेला न समझना अब ये तेरी माँ तुम्हारे साथ है सूरज ये बात सुनकर बड़ा हैरान हुआ और बोला तुम वही हो जो चोरी करके भाग गयी थी। कंकाल माँ बोली नहीं सूरज ये बात सच नहीं है मैंने तुम्हे ५ साल तक पाल – पॉश कर बड़ा किया लकिन तुम्हारे पिता जो एक सराबी थे ,इस घर को बेचने के लिए मुझ पर दबाव डालने लगे, लेकिन मुझे तुम्हारे भविस्य की चिंता थी इसलिए मैंने कभी उसकी बात नहीं मानी। एक दिन जब मैं सो रही थी तभी उसने चाकू से मेरा गला काट दिया और बोला की इसी घर के लिए मुझसे लड़ रही थी तुझे इसी घर में गाड देता हु और मुझे इसी दिवार के निचे गाड़ दिया। और उसके ऊपर दिवार बना दिया और तुझे रोता छोड़ कर वह से भाग गया। सूरज को इ सब सुनकर बहुत दुखी हुआ और उसने अपनी माँ से कहा -माँ तुम्हारी मौत ,तुम्हारा त्याग बेकार नहीं जायेगा ,मैं उस आदमी से तुम्हारा बदला जरूर लूंगा। …आगे पढ़े…..

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