Desi bahu shahri sas hindi kahani

देसी बहू शहरी सास हिंदी कहानी

देसी बहू शहरी सास हिंदी कहानी

देसी बहू शहरी सास हिंदी कहानी -आदर्श नगर गांव में एक मोहिनी नाम की एक लड़की अपने परिवार के साथ रहती है वह बहुत संस्कारी होती है ,वह जवान हो चुकी होती है इसलिए उसके घर वाले उसकी सादी शहर के एक लड़के हिमांशु के साथ कर देते है। मोहिनी की माँ अपने दामाद से कहती है की  बेटा हमरी बेटी बहुत ही अच्छी और गुनी है इसका अच्छे से ख्याल रखना। सादी के बाद मोहिनी अपने ससुराल आ जाती है। जब मोहिनी अपने ससुराल पहुँचती है तो वह पर गृह प्रवेश की सारी रश्मे निभाई जाती है उसकी सास कहती है की बेटी यह जो दरवाजे पर कलश रक्खा है उसमे पैर मारकर अंदर आ जाओ और आज से तुम इस घर की बहु हो और यह घर तुम्हारा है। पड़ोस की औरते भी आयी हुई होती है वे सब मोहिनी को घूर – घूर कर देखती है और कहती है बेटी हमारे यहाँ इतना घूँघट नहीं रखते है हमारे यहाँ पॉव् भी नहीं चुवा जाता है हम लोग तो एक दूसरे को हग करते है ,मोहिनी पूछती है ये हग क्या होता है जी ,औरते कहती है अरे हग तुमको इतना भी नहीं पता यह कहकर वह सभी उसका मजाक बनाते है और उसपे हस्ते है। तभी उसकी सास कहती है वो गांव से आयी है धीरे – धीरे सब शिख जाएगी। उसकी सास कहती है बेटा आंटी के गले लगो ,और मोहिनी आगे बढ़ती है और जोर से आंटी को गले लगा लेती है तो आंटी पीछे हट जाती है और कहती है ओ माई गॉड तुम को तो हग करना भी नहीं आता। गांव की पढ़ी लिखी मोहिनी उसको शहर के रीती रिवाज समझ नहीं आये उसकी सास हमेशा चाहती थी की उसके घर में एक मॉर्डन बहु आये पर अब क्या करे। वह बहु से कहती है बहु मैंने आज शाम को घर में किटी पार्टी रखी है कुछ अच्छा बना लेना।

देसी बहू शहरी सास हिंदी कहानी

अगले दिन पुरे मोहल्ले की हाइ सोसाइटी की आंटी उनके घर किट्टी पार्टी में आती है और मोहिनी से पूंछती है की खाने में क्या है बहु ,उसपर मोहिनी कहती आलू की सब्जी ,पूरी और खीर ,क्या ये खाना तो बहुत ही अनहेल्थी और ऑयली होता है कैसे खाऊ मैं ये खाना ,पास्ता नहीं बनाया तुमने अरे कुछ इटैलियन बना लेती ,मोहिनी पास्ता क्या होता है जी ,सभी आंटी उसपर हसने लगते है और उसकी सास से कहती है अगर खिलाने का मन नहीं था तो बुलाया क्यों हम लोग जा रही है और यह कहकर सब चली जाती है। उसकी सास बहुत गुस्सा हो जाती है और मोहिनी को डांटने लगती है और कहती है तुमने तो मेरी नाक कटवा दी पता नहीं कहा से ये गांव वाली मेरे पल्ले पड़ गयी अब जाओ मेरे सामने से ,मोहिनी बहुत उदाश हो जाती और बहुत रोती है। अगले दिन उसका पति हिमांशु उससे कहता है अरे सुनो मेरा परमोशन हुआ है इसलिए मेरे बॉस में मुझे पार्टी दे रहे है इसलिए तुम भी मेरे साथ चलना ,मोहिनी जी ,हिमांशु – और है गवारो की तरह साड़ी पहनकर मत चलना कोई अच्छी सी ड्रेस पहनकर चलना। अगले दिन जब वह पार्टी में जाती है तो ड्रेस और सैंडल पहन तो लेती है पर उसको बड़ी मुश्किल से हैंडिल कर पाती है पार्टी में सब उस पर हंसने लगते है हिंमाशु उससे कहता है की उदास मत खड़ी हो जाओ सबसे हाय हेलो करो ,मोहिनी – मुझे घर जाना है जी। हिमांशु बहुत गुस्सा होता है और दोनों घर आ जाते है। घर पहुंचकर हिंमाशु कहता है ,न जाने किस घडी में तुम्हारी सूरत देखकर मैंने तुमसे सादी की चली जाओ इस घर से और उसकी सास भी हिमांशु का साथ देती है। लड़ाई करते -करते उसकी सास आगे बढ़ ही रही होती है तभी वह अचानक से गिर जाती है और उससे उसकी कमर में चोट लग जाती है हिमांशु डॉक्टर को बुलाता है और थोड़ी ही देर में डॉक्टर आ जाता है और वो कहते है इनको रेस्ट के जरुरत है आप लोग इनको बेड से हिलने भी नहीं दीजियेगा। मोहिनी जी जी मैं बिलकुल ख्याल रखूंगी डॉक्टर साहब अब फ़िक्र न करे। मोहिनी अपनी सास की खूब सेवा करती है इससे मोहिनी की सास का दिल पिघल जाता है और वह उससे कहती है बहु मैंने हमेशा तुम्हारे बाहरी स्वाभाव को देखा कभी भी मैंने तुम्हारे मन को नहीं देखा तुम बहुत अच्छी हो बहु मुझसे गलती हो गयी मुझे माफ़ कर दो बहु ,मोहिनी की सास अपने बेटे हिमांशु से कहती है बेटा ये बहु नहु सोना है सोना हिमांशु भी अपनी माँ के बात से सहमत होता है उसकी सास कहती है बहु मैं तुम्हे अपने हाथ से पास्ता बनाना शिखाउंगी। इस कहानी से यह सिख मिलती है की किसी इंसान को उसके चल चलन और उसके पहनावे से नहीं पहचाना जा सकता है उसकी असली पहचान तो उसके पास रहकर उसके मन की बातो से की जाती है।

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